Udyoga-parva Adhyāya 126 — Kṛṣṇa’s Indictment of Misrule and the Varuṇa Analogy (कृष्णवाक्यं–धर्मपाशदृष्टान्तः)
स्वधर्ममनुपश्यन्तो यदि माधव संयुगे । अस्त्रेण निधन काले प्राप्स्याम: स्वरग्यमेव तत्
हे माधव! अपने स्वधर्म पर दृष्टि रखकर यदि हम युद्ध में किसी समय शस्त्रों के आघात से मृत्यु को प्राप्त हों, तो वह मृत्यु भी हमारे लिए स्वर्ग-प्राप्ति का ही कारण होगी।
वैशम्पायन उवाच