नारदकथितं माधव्याः तपश्चर्या–ययातेः स्वर्गविचारः | Nārada on Mādhavī’s Asceticism and the Scrutiny of Yayāti in Heaven
सुपर्णस्त्वब्रवीदेनं गालवं वदतां वर: । प्रयत्नस्ते न कर्तव्यो नैष सम्पत्स्यते तव
तब वक्ताओं में श्रेष्ठ सुपर्ण गरुड़ ने गालव से कहा—“अब तुम्हें इसके लिए प्रयत्न नहीं करना चाहिए; यह मनोरथ तुम्हारा सिद्ध नहीं होगा।”
नारद उवाच