Gālava’s Eastern Ascent with Garuḍa; Counsel on Kāla and Upāya (उद्योगपर्व, अध्याय ११०)
उद्यतोडहं द्विजश्रेष्ठ तव दर्शयितुं दिश: । पृथिवीं चाखिलां ब्रह्मुंस्तस्मादारोह मां द्विज,द्विजश्रेष्ठ! मैं तुम्हें सम्पूर्ण पृथ्वी तथा समस्त दिशाओंका दर्शन करानेके लिये उद्यत हूँ; अतः तुम मेरी पीठपर बैठ जाओ
udyato 'haṃ dvijaśreṣṭha tava darśayituṃ diśaḥ | pṛthivīṃ cākhilāṃ brahman tasmād āroha māṃ dvija ||
द्विजश्रेष्ठ! मैं तुम्हें समस्त दिशाओं तथा सम्पूर्ण पृथ्वी का दर्शन कराने के लिए उद्यत हूँ; अतः हे ब्राह्मण! तुम मेरी पीठ पर आरूढ़ हो जाओ।
युपर्ण उवाच