Gālava’s Eastern Ascent with Garuḍa; Counsel on Kāla and Upāya (उद्योगपर्व, अध्याय ११०)
कस्य कार्य किमिति वै परिक्रोशन्ति गालव । विप्रवर गालव! यहाँ प्रतिदिन सबेरे और संध्याके समय सभी दिक्पाल एकत्र हो उच्च स्वरसे यह पूछते हैं कि किसको क्या काम है?
kasya kāryaṃ kim iti vai parikrośanti gālava | vipravara gālava! iha pratidinaṃ sabere ca saṃdhyā-kāle sarve dikpālā ekatra bhūtvā uccaiḥ-svarena etat pṛcchanti—kasya kiṃ kāryam iti |
युपर्ण ने कहा—“हे गालव, हे विप्रवर! यहाँ प्रतिदिन प्रातः और सायं-संध्या के समय सब दिक्पाल एकत्र होकर ऊँचे स्वर से पूछते हैं—‘किसका क्या कार्य है, और क्या करना है?’”
युपर्ण उवाच