Adhyāya 108: Paścima-dik—Varuṇa’s Realm, Sunset Cosmology, and Sacred-Geographic Markers
Suparṇa–Gālava संवाद
ब्रह्म! इस दिशामें सावर्णि मनु तथा यवक्रीतके पुत्रने सूर्यकी गतिके लिये मर्यादा (सीमा) स्थापित की थी, जिसका सूर्यदेव कभी उल्लंघन नहीं करते हैं ।।
yūparṇa uvāca |
brahman! asyāṁ diśi sāvarṇir manuḥ tathā yavakrītaputreṇa sūryasya gatihetor maryādā (sīmā) pratiṣṭhāpitā āsīt, yāṁ sūryadevo na kadācana laṅghayati ||
atra rākṣasarājena paulastyena mahātmanā rāvaṇena tapaḥ kṛtvā surebhyo ’maratā vṛtā ||
यूपर्ण ने कहा—हे ब्राह्मण! इसी दिशा में सावर्णि मनु और यवक्रीत के पुत्र ने सूर्य की गति के लिए ऐसी मर्यादा (सीमा) स्थापित की थी, जिसका सूर्यदेव कभी उल्लंघन नहीं करते। और यहीं पुलस्त्यवंशी, महात्मा राक्षसराज रावण ने तपस्या करके देवताओं से अमरत्व (अथवा अवध्यता) का वर प्राप्त किया था।
युपर्ण उवाच