गालवस्य विषादः तथा विष्णुप्रयाणम्
Gālava’s Despair and Resolve to Seek Viṣṇu
सप्तर्षीणामन्यतमं वेषमास्थाय भारत । बुभुक्षुः क्षुभितो राजन्नाश्रमं कौशिकस्य तु,भारत! धर्म सप्तर्षियोंमेंसे एक (वसिष्ठजी)-का वेष धारण करके भूखसे पीड़ित हो भोजनकी इच्छासे विश्वामित्रके आश्रमपर आये
saptarṣīṇām anyatamaṁ veṣam āsthāya bhārata | bubhukṣuḥ kṣubhito rājann āśramaṁ kauśikasya tu ||
भारत! धर्म सप्तर्षियों में से एक (वसिष्ठजी) का वेष धारण करके, भूख से पीड़ित और भोजन की इच्छा से, राजन्! कौशिक (विश्वामित्र) के आश्रम में आये।
नारद उवाच