गालवस्य विषादः तथा विष्णुप्रयाणम्
Gālava’s Despair and Resolve to Seek Viṣṇu
श्रोतव्यमपि पश्यामि सुहृदां कुरुनन्दन । न कर्तव्यश्न निर्बन्धो निर्बन्धो हि सुदारुण:
कुरुनन्दन! मैं देखता हूँ कि तुम्हें अपने सुहृदों के उपदेश अवश्य सुनने चाहिए; इसलिए किसी एक बात का दुराग्रह नहीं रखना चाहिए। दुराग्रह का परिणाम अत्यन्त भयंकर होता है।
नारद उवाच