Svargārohaṇa-parva, Adhyāya 4 — Yudhiṣṭhira’s Vision of the Celestial Assembly
Recognition and Explanation
गणेषु पश्य राजेन्द्र वृष्ण्यन्धकमहारथान् । सात्यकिप्रमुखान् वीरान् भोजांश्वैव महाबलान्
वैशम्पायन बोले—राजेन्द्र! गणों के बीच वृष्णि-अन्धक कुल के महारथियों को देखो—सात्यकि-प्रमुख उन वीरों को, और महान् बलशाली भोजों को भी।
वैशम्पायन उवाच