स्त्रीपर्व — नवमोऽध्यायः | Dhṛtarāṣṭra summons the Kuru women; the city departs in collective lamentation
संजय उवाच आगम्य नानादेशेभ्यो नानाजनपदेश्वरा: । पितृलोकं गता राजन् सर्वे तव सुतैः सह,संजय बोला--राजन्! नाना जनपदोंके स्वामी विभिन्न देशोंसे आकर सब-के-सब आपके पुत्रोंक साथ पितृलोकके पथिक बन गये
sañjaya uvāca āgamya nānādeśebhyo nānājanapadeśvarāḥ | pitṛlokaṃ gatā rājan sarve tava sutaiḥ saha ||
संजय ने कहा— राजन्! नाना देशों से आकर नाना जनपदों के स्वामी—वे सब-के-सब आपके पुत्रों के साथ पितृलोक को चले गए।
संजय उवाच