Saṃsāra-mārga-vistaraḥ
Vidura’s Expanded Account of the Path
न तत् क्रतुसहस्रेण नोपवासै श्ष नित्यश: । अभयस्य च दानेन यत् फल प्राप्तुयान्नर:,अभयदानसे मनुष्य जिस फलको पाता है, वह उसे सहस्रों यज्ञ और नित्यप्रति उपवास करनेसे भी नहीं मिल सकता है
na tat kratusahasreṇa nopavāsaiś ca nityaśaḥ | abhayasya ca dānena yat phalaṁ prāptum icchati naraḥ ||
अभयदान से मनुष्य जो फल पाता है, वह न तो सहस्र यज्ञों से, न नित्य उपवासों से प्राप्त हो सकता है।
विदुर उवाच