Adhyāya 6: Vidura’s Saṃsāra-Upamā
The Allegory of the Well, Time, and Desire
यस्तत्र वसते5धस्तान्महाहि: काल एव सः | अन्तक: सर्वभूतानां देहिनां सर्वहार्यसौ,नरेश्वर! उस वनमें जो कुआँ कहा गया है, वह देहधारियोंका शरीर है। उसमें नीचे जो विशाल नाग रहता है, वह काल ही है। वही सम्पूर्ण प्राणियोंका अन्त करनेवाला और देहधारियोंका सर्वस्व हर लेनेवाला है
yastatra vasate 'dhastān mahāhiḥ kāla eva saḥ | antakaḥ sarvabhūtānāṁ dehināṁ sarvahāry asau, nareśvara |
विदुर बोले—उसके नीचे जो महा-नाग वास करता है, वह काल ही है। नरेश्वर! वही समस्त प्राणियों का अन्त करनेवाला है और देहधारियों का सर्वस्व हर लेनेवाला है।
विदुर उवाच