Saṃsāra-gahana-jñāna: Vidura’s Account of Embodiment, Bondage, and Dharmic Release (संसारगहन-ज्ञानम्)
अहो विनिकृतो लोको लोभेन च वशीकृत: । लोभक्रोधभयोन्मत्तो नात्मानमवबुध्यते,अहो! लोभके वशीभूत होकर यह सारा संसार ठगा जा रहा है। लोभ, क्रोध और भयसे यह इतना पागल हो गया है कि अपने-आपको भी नहीं जानता
aho vinikṛto loko lobhena ca vaśīkṛtaḥ | lobhakrodhabhayonmatto nātmānam avabudhyate ||
अहो! लोभ के वशीभूत होकर यह सारा संसार ठगा जा रहा है। लोभ, क्रोध और भय से उन्मत्त होकर मनुष्य अपने-आपको भी नहीं जानता।
विदुर उवाच