Gaṅgā-tīra Udaka-kriyā and Kuntī’s Disclosure of Karṇa’s Maternity
Strī-parva, Adhyāya 27
वीरपत्नीभिराकीर्ण गज़ातीरमशो भत । महासागरके समान विशाल वह गंगातट आनन्द और उत्सवसे शून्य होनेपर भी उन वीर-पत्नियोंसे व्याप्त होनेके कारण बड़ी शोभा पाने लगा
vaiśampāyana uvāca | vīrapatnībhiḥ ākīrṇaṃ gaṅgātīram aśobhat | mahāsāgarakasamaṃ viśālaṃ tad gaṅgātaṭam ānanda-utsavaśūnyaṃ api vīrapatnībhiḥ vyāptaṃ sat mahatyā śobhāṃ prāpa |
वैशम्पायन बोले—वीरों की पत्नियों से भरा हुआ गंगा-तट अद्भुत शोभा पा रहा था। महासागर के समान विशाल वह विस्तृत तट, आनंद और उत्सव से रिक्त होकर भी, उन वीरांगनाओं की उपस्थिति से एक गंभीर, शोकमय तेज से दीप्त हो उठा।
वैशम्पायन उवाच