Gāndhārī’s Battlefield Survey: The Fallen and the Onset of Funeral Rites (शल्य-भगीरथ-भीष्म-द्रोणादि-दर्शनम्)
नास्ति युद्धे कृती कश्रिन्न विद्वान् न पराक्रमी | यत्र शान्तनवो भीष्म: शेतेडद्य निहत: शरै:,जब ये शान्तनुनन्दन भीष्म भी आज शत्रुओंके बाणोंसे मारे जाकर सो रहे हैं तो यही कहना पड़ता है कि 'युद्धमें न कोई कुशल है, न विद्वान् है और न पराक्रमी ही है”
nāsti yuddhe kṛtī kaścin na vidvān na parākramī | yatra śāntanavo bhīṣmaḥ śete ’dya nihataḥ śaraiḥ ||
वैशम्पायन बोले—युद्ध में न कोई सचमुच कुशल है, न विद्वान, न पराक्रमी—जब शान्तनुनन्दन भीष्म आज बाणों से आहत होकर यहाँ पड़े हैं।
वैशम्पायन उवाच