Strī Parva, Adhyāya 2 — Vidura’s Consolation on Kāla, Karma, and the Limits of Lamentation (विदुरोपदेशः)
शरीराग्निषु शूराणां जुह॒वुस्ते शराहुती: । हूयमानान् शरांश्वैव सेहुस्तेजस्विनो मिथ:,शूरवीरोंके शरीररूपी अग्नियोंमें उन्होंने बाणोंकी आहुतियाँ दी हैं और उन तेजस्वी वीरोंने एक-दूसरेकी शरीराग्नियोंमें होम किये जानेवाले बाणोंको सहन किया है
śarīrāgniṣu śūrāṇāṃ juhavus te śarāhutīḥ | hūyamānān śarāṃś caiva sehustejasvino mithaḥ ||
शूरवीरों के शरीररूपी अग्नियों में उन्होंने बाणों की आहुतियाँ दीं; और वे तेजस्वी वीर एक-दूसरे की देहाग्नि में होम किए जाते हुए उन्हीं बाणों को परस्पर सहते रहे।
विदुर उवाच