Adhyāya 17 — Gandhārī’s Vilāpa at Duryodhana’s Body (स्त्रीपर्व, अध्याय १७)
नूनमेषा पुरा बाला जीवमाने महीभुजे । भुजावाश्रित्य रमते सुभुजस्य मनस्विनी,“पहले जब राजा दुर्योधन जीवित था, तब निश्चय ही यह मनस्विनी बाला सुन्दर बाहोंवाले अपने वीर पतिकी दोनों भुजाओंका आश्रय लेकर इसी तरह उसके साथ सानन्द क्रीड़ा करती रही होगी
nūnam eṣā purā bālā jīvamāne mahībhuje | bhujāv āśritya ramate subhujasya manasvinī |
निश्चय ही, जब वह भूपति जीवित था, तब यह मनस्विनी युवती अपने सुबाहु पति की भुजाओं का आश्रय लेकर इसी प्रकार उसके साथ आनन्दपूर्वक रमण करती होगी।
वैशम्पायन उवाच