स्त्रीपर्व — गान्धारीभीमसेनसंवादः
Strī-parva — Gāndhārī–Bhīmasena Dialogue on Wartime Conduct
युध्यमाना हि कौरव्या: कृन्तमाना: परस्परम् | निहता: सहिताश्षान्यैस्तच्च नास्त्यप्रियं मम,कौरव आपसमें ही जूझकर मारकाट मचाते हुए अपने दूसरे साथियोंके साथ मारे गये हैं; अत: इसमें मुझे अप्रिय लगनेवाली कोई बात नहीं है
yudhyamānā hi kauravyāḥ kṛntamānāḥ parasparam | nihatāḥ sahitāḥ śānyais tac ca nāsty apriyaṃ mama ||
वैशम्पायन बोले—कौरव आपस में ही युद्ध करते हुए, एक-दूसरे को काटते-छाँटते, अपने साथियों सहित मारे गए हैं; इसलिए इसमें मुझे अप्रिय या दुःखद कुछ भी नहीं है।
वैशम्पायन उवाच