Vāmadeva’s Counsel on Rooted Kingship and Non-violent Victory (वामदेवोपदेशः—दृढमूलराजधर्मः)
जिसे श्रेष्ठ पुरुष बुरा समझते हों, बुद्धिमान राजा वैसा कर्म कभी न करे। जिस कार्यको सबके लिये कल्याणकारी समझे, उसीमें अपने आपको लगावे ।।
na enam anye 'vajānanti na ātmanā paritapyate | kṛtyaśeṣeṇa yo rājā sukhāny anububhūṣati ||
जो राजा अपना कर्तव्य पूर्ण करके ही सुख का अनुभव करना चाहता है, उसका न तो दूसरे लोग अनादर करते हैं और न वह स्वयं ही संतप्त होता है।
वामदेव उवाच