Adhyāya 90 — Protection of Livelihoods, Brahmanical Subsistence Norms, and Royal Oversight (राष्ट्रवृत्ति-राष्ट्रगुप्ति-उपदेशः)
कच्चित् ते वणिजो राष्ट्रे नोद्विजन्ति करार्दिता: | क्रीणन्तो बहुनालल्पेन कान्तारकृतविश्रमा:
क्या तुम्हारे राज्य में व्यापारीजन करों से पीड़ित होकर उद्विग्न तो नहीं रहते—जो कभी ऊँचे, कभी नीचे भाव से माल खरीदते हैं और व्यापार हेतु दुर्गम प्रदेशों में घूम-घूमकर विश्राम करते हैं?
भीष्म उवाच