Adhyāya 90 — Protection of Livelihoods, Brahmanical Subsistence Norms, and Royal Oversight (राष्ट्रवृत्ति-राष्ट्रगुप्ति-उपदेशः)
कि छिद्रंं को नु सड़ो मे कि वास्त्यविनिपातितम् । कुतो मामाश्रयेद् दोष इति नित्यं विचिन्तयेत्
मुझमें कौन-सा छिद्र है, कौन-सी आसक्ति है, और कौन-सी ऐसी बुराई है जो अब तक दूर नहीं हुई? किस कारण से मुझ पर दोष आता है?—इन बातों पर राजा को नित्य विचार करना चाहिये।
भीष्म उवाच