Kośārtha-Rājadharma: Ethical Revenue Collection and Social Regulation (कोशार्थ-राजधर्मः)
कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं यच्चान्यत् किंचिदीदृशम् । पुरुषै: कारयेत् कर्म बहुभि: कर्मभेदत:
खेती, गोरक्षा, वाणिज्य तथा इसी प्रकार के अन्य कार्य—जिस-जिस कर्म में जो-जो पुरुष कुशल हो, उस भेद के अनुसार अधिक लोगों से वे कार्य कराए जाएँ।
भीष्य उवाच