Previous Verse
Next Verse

Shloka 14

Kośārtha-Rājadharma: Ethical Revenue Collection and Social Regulation (कोशार्थ-राजधर्मः)

पानागारनिवेशाश्ष वेश्या: प्रापणिकास्तथा । कुशीलवा: सकितवा ये चान्ये केचिदीदृशा:

जो मदिरालयों का प्रबन्ध करते हैं, वेश्याएँ, कुट्टनियाँ और उनके दलाल, जुआरी, तथा ऐसे ही अन्य दुष्ट वृत्तिवाले लोग—ये सब राष्ट्र के लिए हानिकर हैं। इसलिए राजा को चाहिए कि दण्ड द्वारा इन्हें दबाकर रखे; क्योंकि यदि ये राज्य में टिके रहें, तो कल्याणमार्ग पर चलने वाली प्रजा के लिए बड़ी बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।

भीष्य उवाच