अग्राह्य-ज्ञातिसंबन्धमण्डल-विवेचनम् / Managing Unreadable Kinship Networks: Vāsudeva–Nārada on Cohesion
भेदाद् विनाश: संघानां संघमुख्योडसि केशव । यथा त्वां प्राप्य नोत्सीदेदयं संघस्तथा कुरु
केशव! आप इस संघ के मुखिया हैं। संघ में फूट पड़ते ही उसका विनाश हो जाता है; इसलिए ऐसा कीजिए कि आपको पाकर यह संघ नष्ट न हो, अपितु स्थिर और सुरक्षित रहे।
नारद उवाच