धन-राजधर्म संवादः
Discourse on Wealth and Royal Duty
अवेक्षस्व यथान्यायं पश्य देवासुरं यथा । राजन् किमन्यज्जातीनां वधाद् गृद्धयन्ति देवता:
avekṣasva yathānyāyaṁ paśya devāsuraṁ yathā | rājan kim anyaj jātīnāṁ vadhād gṛddhyanti devatāḥ |
अर्जुन बोले—राजन्! न्याय के अनुसार विचार कीजिए और देखिए कि देवता और असुर कैसे आचरण करते हैं। हे राजन्, देवता अपने ही जाति-भाइयों के वध के सिवा और क्या चाहते हैं? एक ही पिता से उत्पन्न होने के कारण देव और असुर वास्तव में परस्पर भाई ही हैं।
अर्जुन उवाच