Yogakṣema, Purohita, and the Mucukunda–Vaiśravaṇa Dialogue (योगक्षेम–पुरोहित–मुचुकुन्दवैश्रवणसंवादः)
ब्रद्माक्षत्रमिदं सृष्टमेकयोनि स्वयम्भुवा । पृथग्बलविधानं तन्न लोक॑ परिपालयेत्
“राजराज! ब्राह्मण और क्षत्रिय—ये दोनों स्वयम्भू ब्रह्मा से एक ही मूल से उत्पन्न हुए हैं। यदि दोनों का बल-प्रयत्न अलग-अलग हो जाए, तो वे लोक की रक्षा नहीं कर सकते।”
धनद उवाच