Yudhiṣṭhira’s Lament for Karṇa and Renunciation-Oriented Self-Assessment (शोक-प्रलापः / त्याग-प्रवृत्तिः)
न सकामा वयं ते च न चास्माभिरनन तैर्जितम् न तैर्भुक्तेयमवनिर्न नायों गीतवादितम्
युधिष्ठिर बोले—इस युद्ध से न हमारी कामना पूरी हुई, न कौरवों की। न हमारी जीत हुई, न उनकी। उन्हें न पृथ्वी का भोग मिला, न स्त्रियों का सुख, और न गीत-वाद्य का आनंद ही प्राप्त हुआ।
युधिछिर उवाच