राजा-दैवतत्वम् — The King as a Stabilizing ‘Daivata’ (Divine Function) in Social Order
तस्माद् राजैव कर्तव्य: सततं भूतिमिच्छता । न धनार्थो न दारार्थस्तेषां येघामराजकम्
इसलिए जो सदा उन्नति चाहता हो, उसे अपने देश की रक्षा के लिए अवश्य ही राजा नियुक्त करना चाहिए। जहाँ अराजकता होती है, वहाँ न धन सुरक्षित रहता है, न स्त्रियों पर उनका स्वत्व स्थिर रह पाता है।
भीष्म उवाच