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Shloka 48

Āśrama-dharma: Duties of the Four Life-Stages (आश्रमधर्मः)

अत्र गाथा यज्ञगीता: कीर्तयन्ति पुराविद: | वैखानसानां राजेन्द्र मुनीनां यट्टमिच्छताम्‌

राजेन्द्र! इस विषय में प्राचीन वृत्तान्तों के ज्ञाता विद्वान् यज्ञ-विषयक एक गाथा का उल्लेख करते हैं, जो यज्ञ की अभिलाषा रखने वाले वैखानस मुनियों द्वारा गायी गयी है।

भीष्म उवाच