Varṇa-dharma and Rājadharma: Yudhiṣṭhira’s Inquiry and Bhīṣma’s Normative Outline (वर्णधर्म-राजधर्म-प्रश्नोत्तरम्)
एवं लोकानुरोधेन शास्त्रमेतन्महर्षिभि: । संक्षिप्तमायुर्विज्ञाय मर्त्यानां ह्ासमेव च,इस प्रकार मनुष्योंकी आयुका हास होता जानकर जगतके हितके लिये महर्षियोंने इस शास्त्रका संक्षेप किया है
evaṁ lokānurodhena śāstram etan maharṣibhiḥ | saṁkṣiptam āyur vijñāya martyānāṁ hrāsam eva ca ||
भीष्म ने कहा—इस प्रकार लोक की आवश्यकता के अनुसार, मनुष्यों की आयु घटती जा रही है—यह जानकर और उसके निरन्तर ह्रास को देखकर—महर्षियों ने जगत्-हित के लिए इस शास्त्र का संक्षेप किया।
भीष्म उवाच