Varṇa-dharma and Rājadharma: Yudhiṣṭhira’s Inquiry and Bhīṣma’s Normative Outline (वर्णधर्म-राजधर्म-प्रश्नोत्तरम्)
सुसूक्ष्मा मे समुत्पन्ना बुद्धिर्धर्मार्थदर्शिनी । अनया किं मया कार्य तन्मे तत्त्वेन शंसत
महात्माओ! धर्म और अर्थ का दर्शन कराने वाली अत्यन्त सूक्ष्म बुद्धि मुझे स्वयं प्राप्त हुई है। इस बुद्धि से मुझे कौन-सा कार्य करना है, वह आप लोग मुझे तत्त्वतः बताइए।
भीष्म उवाच