राजधर्मप्रश्नः — Yudhiṣṭhira’s Inquiry into Rājadharma (Śānti-parva 56)
इस प्रकार श्रीमह्ाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वनें युधिष्ठिरको आश्वासनविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ,इदं ते दुष्करं राजन्निदं ते दुष्टचेष्टितम् । इत्येवं सुह्दो वाचं वदन्ते परिषद्गता:
“राजन्! यह काम आपसे कठिन है; और आपका यह आचरण बहुत बुरा है”—इस प्रकार सभा में बैठे लोग मित्रों की तरह बातें कहने लगते हैं।
वैशम्पायन उवाच