Śānti Parva, Adhyāya 52 — Bhīṣma’s Humility Before Kṛṣṇa and the Granting of Boons
संसरन्तं प्रजाजालं संयुक्तो ज्ञानचक्षुषा | भीष्म द्रक्ष्यसि तत्त्वेन जले मीन इवामले
हे भीष्म! ज्ञानदृष्टि से सम्पन्न होकर आप संसार में भटकते समस्त जीवसमुदाय को तत्त्वतः वैसे ही देख सकेंगे, जैसे निर्मल जल में मछली सब कुछ देखती है।
वायुदेव उवाच