Yudhiṣṭhira’s Post-Accession Settlements and Approach to Vāsudeva (युधिष्ठिरस्य राज्यस्थापनं वासुदेवाभिगमनं च)
कृपाय च महाराज गुरुवृत्तिमवर्तत । विदुराय च राजासौ पूजां चक्रे यतव्रत:
महाराज! राजा ने कृपाचार्य के साथ वही गुरु-शिष्य-धर्म निभाया, जो शिष्य को अपने गुरु के प्रति करना चाहिए। नियम-व्रत का पालन करने वाले युधिष्ठिर ने विदुर का भी पूज्य पुरुष की भाँति आदर-सत्कार किया।
वैशम्पायन उवाच