Śānti-parva Adhyāya 44 — Post-War Reassignment of Residences and Restorative Consolation (शान्तिपर्व अध्याय ४४)
शत्रुभिविविधै: शस्त्रै: क्षतदेहा महारणे । श्रान्ता भवन्त: सुभृशं तापिता: शोकमन्युभि:
महासमर में शत्रुओं ने नाना प्रकार के शस्त्रों से तुम्हारे शरीर घायल कर दिए हैं। तुम सब अत्यन्त श्रान्त हो और शोक तथा क्रोध से बहुत संतप्त हो।
वैशम्पायन उवाच