धृतराष्ट्र-सेवा, राज्य-कार्य-विभागः
Service to Dhṛtarāṣṭra and Allocation of State Duties
धन्या: पाण्डुसुता नून॑ येषां ब्राह्मणपुड्वा: । तथ्यान् वाप्यथवातथ्यान् गुणानाहु: समागता:
निश्चय ही हम पाण्डु-पुत्र धन्य हैं, जिनके गुणों का वर्णन यहाँ पधारे हुए ब्राह्मण-श्रेष्ठ कर रहे हैं। वे गुण वास्तव में हममें हों या न हों, आप लोग हमें गुणवान् कह रहे हैं।
वैशम्पायन उवाच