धृतराष्ट्र-सेवा, राज्य-कार्य-विभागः
Service to Dhṛtarāṣṭra and Allocation of State Duties
उत्थायोत्थाय तत् कार्यमस्य राज्ञ: पितुर्मम । सर्व भवद्धिः कर्तव्यमप्रमत्तैर्यथायथम्
utthāyotthāya tat kāryam asya rājñaḥ pitur mama | sarvaṁ bhavadbhiḥ kartavyam apramattair yathāyatham ||
वैशम्पायन बोले—“प्रतिदिन उठ-उठकर इस राजा—जो मेरे पिता तुल्य हैं—के लिए वह समस्त कार्य तुम लोगों को करना चाहिए। सदा सावधान रहकर, जैसा- जैसा उचित हो, वैसा-वैसा यथाविधि सम्पन्न करना।”
वैशम्पायन उवाच