Nārada’s Account of the Kaliṅga Svayaṃvara: Duryodhana’s Seizure and Karṇa’s Escort
स वीर्यमदमत्तत्वाद् भीष्मद्रोणावुपाश्रित: । रथमारोप्य तां कन्यामाजहार नराधिप:
sa vīrya-mada-mattatvād bhīṣma-droṇāv upāśritaḥ | ratham āropya tāṃ kanyām ājahāra narādhipaḥ ||
नारद ने कहा—अपने पराक्रम के मद से उन्मत्त और भीष्म तथा द्रोणाचार्य के सहारे पर निर्भर होकर, उस राजा ने राजकन्या को रथ पर बिठाकर बलपूर्वक उठा लिया और ले गया।
नारद उवाच