दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food
तत् प्रयाणं महाबाहोर्ब भूवाप्रतिमं भुवि | आकुलाकुलमुत्त्ुष्टं हृष्टपुष्टजनाकुलम्
महाबाहु युधिष्ठिर की वह सामूहिक यात्रा इस पृथ्वी पर अनुपम थी; उसमें हृष्ट-पुष्ट जनसमूह उमड़ पड़ा था, भीड़ पर भीड़ बढ़ती जाती थी और प्रबल जयघोष तथा कोलाहल गूँज रहा था।
वैशम्पायन उवाच