दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food
एतैश्वान्यैश्वन बहुभिरनुनीतो युधिष्ठिर: । व्यजहान्मानसं दु:ःखं संतापं च महायशा:
नरश्रेष्ठ! इन तथा अन्य बहुत-से लोगों के समझाने-बुझाने पर महायशस्वी युधिष्ठिर ने मानसिक दुःख और संताप का परित्याग कर दिया।
वैशम्पायन उवाच