दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food
वैशम्पायन उवाच ततस्तं नृपतिमश्रेष्ठं चातुर्वर्ण्यहितेप्सया । पुनराह महाबाहुर्यदुश्रेष्ठी महामति:
वैशम्पायन बोले—हे जनमेजय! तब चारों वर्णों के हित की इच्छा से महाबाहु, परम बुद्धिमान् यदुश्रेष्ठ श्रीकृष्ण ने नृपतिश्रेष्ठ युधिष्ठिर से फिर कहा।
वैशम्पायन उवाच