नाग उवाच अनुक्त्वा हृद्गतं कार्य क्वेदानीं प्रस्थितो भवान् । उच्यतां द्विज यत् कार्य यदर्थ त्वमिहागत:
नाग ने कहा—विप्रवर! अपने हृदयगत कार्य को बताये बिना आप अब कहाँ चले जा रहे हैं? हे द्विज, जिस कार्य के लिये आप यहाँ आये हैं, उसे कहिये।
नाग उवाच