Nāga-āyatana-darśana-pratīkṣā — The Brāhmaṇa’s Request and Waiting on the Gomatī
अद्यापि चैनं पश्यामि युवां पश्चन् सनातनौ
मैं आज भी आप दोनों सनातन पुरुषों को देखते हुए, यहीं श्वेतद्वीप-निवासी भगवान् की झाँकी कर रहा हूँ। वहाँ अव्यक्त-रूपधारी श्रीहरि को जिन लक्षणों से युक्त मैंने देखा था, आप दोनों व्यक्त-रूपधारी पुरुष भी उन्हीं लक्षणों से सुशोभित हैं।
नारद उवाच