Atithi’s Direction to the Nāga-sage Padma at Naimiṣa (अतिथ्युपदेशः—नैमिषे पद्मनागोपाख्यानप्रस्तावः)
अहल्याधर्षणनिमित्तं हि गौतमाद्धरिश्मश्रुतामिन्द्र: प्राप्त: कौशिकनिमित्तं चेन्द्रो मुष्कवियोगं मेषवृषणत्वं चावाप
अहल्या का अपमान करने के कारण गौतम के शाप से इन्द्र को हरिश्मश्रु (हरी दाढ़ी-मूँछों वाला) होना पड़ा। और कौशिक (विश्वामित्र) के शाप से इन्द्र का अण्डकोष-वियोग हुआ तथा उसके स्थान पर मेष के अण्डकोष लग गये।
अजुन उवाच