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Shloka 61

Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)

युगे युगे भविष्यध्व॑ प्रवृत्तिफलभागिन: । “'देवताओ! मेरी कृपासे तुम्हारा ऐसा ही लक्षण होगा। तुम प्रत्येक युगमें उत्तम दक्षिणाओंसे संयुक्त यज्ञोंद्वारा यजन करके प्रवृत्तिरूप धर्मफलके भागी होओगे || ६० ई ।।

देवताओं! तुम युग-युग में प्रवृत्ति-रूप धर्मफल के भागी होओगे; और समस्त लोकों में देवगण भी यज्ञों द्वारा यजन करेंगे।

वैशम्पायन उवाच