Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
अश्विभ्यां पतये चैव मरुतां पतये तथा । वेदयज्ञाधिपतये वेदाड़पतयेडपि च,वे अश्विनीकुमारोंक पति, मरुदगणोंके पालक, वेद और यज्ञोंके अधिपति तथा वेदांगोंके भी स्वामी हैं। उन्हें प्रणाम करो
aśvibhyāṃ pataye caiva marutāṃ pataye tathā | vedayajñādhipataye vedāṅgapataye 'pi ca ||
जो अश्विनीकुमारों के स्वामी, मरुद्गणों के अधिपति, वेदों और यज्ञों के प्रभु तथा वेदाङ्गों के भी स्वामी हैं—उन्हें प्रणाम करो।
व्यास उवाच