धर्मस्य बहुद्वारत्वम् — Nārada’s Audience with Indra (Śānti-parva 340)
अवध्य: सर्वलोकानां सदेवासुररक्षसाम् । भविष्यति स शक्रं वा स्वराज्याच्च्यावयिष्यति
avadhyaḥ sarvalokānāṃ sadevāsurarākṣasām | bhaviṣyati sa śakraṃ vā svarājyāc cyāvayiṣyati ||
भीष्म ने कहा—“वह समस्त लोकों के लिए—देव, असुर और राक्षसों सहित—अवध्य होगा। वह उत्पन्न होकर शक्र (इन्द्र) को भी उसके अपने राज्य से च्युत कर देगा।”
(भीष्म उवाच