एकान्तिधर्म-प्रश्नः (Inquiry into Ekāntin Dharma) / The Origin and Practice of Single-Pointed Nārāyaṇa-Centered Discipline
पाउचरात्रविदो मुख्यास्तस्य गेहे महात्मन: । प्रायणं भगवत्प्रोक्तं भुज्जते वाग्रभोजनम्
उस महात्मा नरेश के भवन में पाञ्चरात्र-शास्त्र के प्रमुख विद्वान सदा उपस्थित रहते थे; और भगवान् को अर्पित किया हुआ नैवेद्य-प्रसाद, भोजन में सबसे पहले वही ग्रहण करते थे।
भीष्म उवाच