Nārada’s Darśana of Viśvarūpa Nārāyaṇa and the Caturmūrti Doctrine (नारदस्य नारायणदर्शनं चतुर्मूर्तिविचारश्च)
भवांश्षोत्पन्नविज्ञान: स्थिरबुद्धिरलोलुप: । व्यवसायादूते ब्रह्मुन्नासादयति तत्परम्
ब्रह्मन्! आपको ज्ञान प्राप्त हो चुका है। आपकी बुद्धि स्थिर है और विषय-लोलुपता का सर्वथा अभाव है; परंतु विशुद्ध निश्चय (दृढ़ संकल्प) के बिना कोई परम ब्रह्म-भाव को नहीं प्राप्त होता।
जनक उवाच