देवतापितृप्रश्नः — Nārada at Badarīāśrama: the ultimate referent of daiva and pitṛ worship
अहर्निशिषु सर्वतः स्पृशत्सु सर्वचारिषु । प्रकाशगूढवृत्तिषु स्वधर्ममेव पालय
दिन और रात्रि—जो सर्वत्र विचरते और सबको स्पर्श करते हैं—कभी प्रकाश करते हैं, कभी छिपा देते हैं। इसलिए उनकी सीमा में रहते हुए तुम सदा अपने स्वधर्म का ही पालन करो।
व्यास उवाच