Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
नन्यूनं कष्टशब्दं वा विक्रमाभिहितं न च न शेषमनु कल्पेन निष्कारणमहेतुकम्
na nyūnaṃ kaṣṭaśabdaṃ vā vikramābhihitaṃ na ca | na śeṣam anu kalpena niṣkāraṇam ahetukam ||
भीष्म ने कहा—मेरे वचन में न न्यूनता का दोष होगा, न कष्टकर शब्दों का प्रयोग, न क्रमभंग। उसे समझने के लिए न छूटे हुए पदों की जबरन पूर्ति करनी पड़ेगी, न लक्षणा का आश्रय लेना होगा। वह निष्प्रयोजन या युक्तिहीन भी न होगा।
भीष्य उवाच